इंसान को अपने पिछले जन्म के बारे में क्यों याद नहीं रहता है – गरुड़ पुराण?

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दोस्तों पुनर्जन्म से जुड़ा विषय जितना रोचक लगता है उतना ही रहस्यमय है। अगर आप कभी भी किसी से यह पूछेंगे कि उसका पिछला जन्म याद है, तो उनका उत्तर होगा नहीं। लेकिन हिंदू धर्म शास्त्र में इनका जवाब विस्तार पूर्वक से बताया गया है कि क्यों हमें पिछले जन्म का कुछ भी बातें याद नहीं रहता है, इसी विषय के बारे में आज हम लोग जानेंगे कि पिछले जन्म के बारे मे हिंदू धर्म शास्त्र एवं पुराणों में क्या उल्लेख मिलता है।

 हमें पिछले जन्म का कुछ याद क्यों नहीं रहता?

दोस्तों पुनर्जन्म का अर्थ होता है कि एक बार फिर से शरीर को प्राप्त होना। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार मनुष्य का मूल स्वरूप आत्मा है ना कि उनका शरीर। पुनर्जन्म की अवधारणा कर्म के सिद्धांत पर आधारित है और जन्म और मृत्यु के चक्र में हमेशा चलता ही रहता है जब तक आत्मा परमात्मा में लीन ना हो जाए तब तक यह चक्र चलता ही रहता है। मित्रों जब भी मनुष्य धरती पर जन्म लेता है तो उसके पिछले जन्म की कोई भी बातें याद क्यों नहीं रहती है इसका उत्तर हमें हिंदू धर्म के धर्म शास्त्र गरुड़ पुराण के धर्म काण्ड के प्रेत कल्प अध्याय नहीं मिलता है। जहां पर गर्भधारण से लेकर शिशु की 9 महीने की यात्रा का वर्णन मिलता है तो चलिए जानते है।

 माता के गर्भ में शिशु का वर्णन

गरुड़ पुराण के अनुसार भगवान विष्णु गरुड़ को यह बताते हैं कि शिशु जब माँ के गर्भ में होता है तब उसे अपने सभी पिछले जन्मों के कर्मों को याद होता है और वह भगवान से प्रार्थना करता है कि हे ईश्वर में इस गर्भ से अलग नहीं होना चाहता हूँ क्योंकि बाहर वही सांसारिक दुनिया है जहां मुझे जाने अनजाने में पाप कर्म करने पड़ेंगे, इस कारण में बड़े दुख से व्याप्त हूँ फिर भी दुख रहित होकर आपके चरण का आश्रय लेकर आत्मा का संसार से उद्धार करूंगा, माता के गर्भ में पूरे 9 महीने शिशु भगवान से यही प्रार्थना करता है।

लेकिन यह समय पूरा होते ही धीरे-धीरे 6 मास के बाद शिशु का मस्तक नीचे की ओर और पैर ऊपर की ओर हो जाते हैं ऐसी स्थिति में वह चाह कर भी इधर-उधर हिल नहीं पाता है। वह खुद को एक पिंजरे में बंद हुए पक्षी की तरह महसूस करता है इसके बाद वह फिर अपने आसपास गंदगी देख वह भगवान से फिर प्रार्थना करता है और कहता हे भगवान मुझे बाहर कब निकालेंगे। 6 महीने बीत जाने के बाद शिशु को फिर भूख प्यास लगने लगती है वह अपने जगह बदलने के लायक भी हो जाता है और इस दौरान उन्हें कष्ट भी होता है इन कष्टों के कारण व गर्भ में बेहोश भी हो जाता है। शिशु की माता जो भोजन ग्रहण करती है वही उसके लिए भी होता है।

 पिछले जन्म के कर्मों को क्यों याद नहीं आता

गरुड़ पुराण के अनुसार प्रसूति की हवा से जैसे ही सांस लेता हुआ शिशु माता के गर्भ से बाहर निकलता है तो उसे किसी भी बात का ज्ञान नहीं रहता और अपने सभी पिछले जन्मों के कर्मों को भूल जाता है । माता के गर्भ से अलग होकर और इस सांसारिक माया की दुनिया में आकर वह ज्ञान रहित हो जाता है इसी कारण व जन्म के समय रोता है। और उसके बाद भगवान विष्णु पक्षीराज गरुड़ से कहते हैं – कि यही कारण है घर में पहुंचकर जो जीवात्मा जैसा चिंतन करती है शरीर धारी मनुष्य वैसे ही जन्म लेकर बालक, युवा और वृद्ध होता है।

 

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