काला धागा या काला टीका क्यों लगाया जाता है, इसके पीछे का राज क्या है?

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मित्रों आपने देखा होगा कि अधिकतर लोग हाथ में या पैर में काला धागा बांधते हैं, कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं जो काले धागे को अपने गले में पहने हुए होते है आपने भी कभी-न-कभी काला धागा पहना ही होगा लेकिन मित्रों क्या आप जानते हैं कि आखिर लोग काला धागा क्यों पहनते है और इसका धार्मिक महत्व क्या है। अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि हिंदू धर्म में काले रंग को अशांति और अशुभ का प्रतीक माना जाता है अर्थात जिसे सभी शुभ कार्यों से दूर रखा जाता है, तो फिर लोग इसे बांधते क्यों है और उसके पीछे का उद्देश्य क्या है अगर आपको नहीं मालूम है तो आज हम जानेंगे कि लोग काले रंग, काले धागे या काले टीके का प्रयोग क्यों करते हैं?

काला धागा या काला टीका लगाने के फायदे 

आज के समय में कई लोग अपनी जिंदगी में काले धागे को फैशन के रूप में भी बनते हैं लेकिन उनमें से अधिकतर लोग इसके पीछे छिपे कारणों के बारे में नहीं जानते है। काले धागे और काले टीके लगाने के पीछे पारंपरिक और वैज्ञानिक दोनों ही कारण जुड़े  हुए है। धर्म शास्त्रों के अनुसार काला रंग नकारात्मक ऊर्जा या दूसरे शब्दों में कहे तो बुरी नजरों से बचने के लिए क्या किया जाता है। आपने कई छोटे बच्चों को माताओं द्वारा बचपन में काला टीका लगाते हुए देखा होगा, धर्म के विद्वानों के अनुसार जाने तो माताएं अपने बच्चे को काला टीका इसलिए लगाती है ताकि उनके बच्चों को बुरी नजर ना लगे और नकारात्मक ऊर्जा से बचा रहे।

 काला धागा से जुड़ी पौराणिक कथा 

हिंदू धर्म शास्त्रों में काले रंग को भगवान शनि और राहु देव से संबंधित बताया गया है साथ ही यह भी बताया जाता है कि काले रंग का भगवान शिव के सेनाध्यक्ष भैरव देव से भी है। इस बारे में पंडितों का मानना है कि हरि का अंश और महाकाल शिव के पांचवे रूप भैरवनाथ अर्थात काल भैरव की उपासना से दैविक, दैहिक और मानसिक समस्याओं का समाधान होता है इसलिए लोग काले रंग का उपयोग कर अपने रोजमर्या की परेशानियों से बचना चाहते हैं। शिव जी द्वारा प्राप्त वरदान के अनुसार शिव जी के पूजा के पूर्व महाकाल भैरव देव की पूजा होना अनिवार्य है। ऐसा कहा जाता है कि भैरव देव थोड़े उग्र व्यवहार के है परन्तु वे भगवान शिव की तरह ही शीघ्र प्रसन्न भी जल्दी हो जाते हैं इसलिए उन्हें देवों का कोतवाल भी कहा जाता है।

अब हम जानेंगे वैज्ञानिक कारणों के बारे में, जैसे कि धर्म शास्त्र में बताया गया है कि मनुष्य का शरीर पांच तत्वों यानि कि क्षिति ,जल, पावक, समीरा, गगन से बना हुआ है ठीक उसी प्रकार विज्ञान भी मानता कि मनुष्य का शरीर पांच तत्व यानी कि पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल, आकाश से मिलकर बना है। इन पांचों तत्वों से मनुष्य के जीवन का संचालन और सुविधाओं की प्राप्ति होती है जब इस पर किसी की बुरी नजर पड़ती है तो इन पांच तत्व से मिलने वाले सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव मनुष्य के शरीर पर विपरीत पड़ने लगती है और उसके जीवन में बनने वाले सारे काम बिगड़ने लगते हैं इसलिए काले धागे का इस्तेमाल कर नकारात्मक ऊर्जाओं को कम करने का प्रयास किया जाता है।

जैसा कि आप सब ने ज्यादातर लोग विज्ञान में पढ़ा होगा किस काला रंग ऊष्मा के अवशोषण का प्रभावी माध्यम है इसलिए वैज्ञानिक रूप से नकारात्मक ऊष्मा के अवशोषण के लिए काले रंग का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा बहुत से लोग काला धागा बांधने की परंपरा पर विश्वास करते हैं और बहुत से लोग इसे अंधविश्वास भी मानते हैं, विश्वास और अंधविश्वास का तथ्य तो लोगों की मानसिकता पर आधारित है। अर्थात यदि आप किसी भी धार्मिक परंपरा को मानते हैं या फिर उसमे विश्वास रखते हैं तो वही सत्य है और यदि आप परंपरा पर विश्वास नहीं करते तो वही आपके लिए अंधविश्वास बन जाता है अब यह आप पर निर्भर करता कि आप काला धागा बांधने की परंपरा को किस श्रेणी मे रख़ना चाहते है।

 काले धागे का उपयोग – धन प्राप्ति 

 कुछ लोगों का मानना है कि काले धागे का उपयोग लोग सिर्फ बुरी नजर से बचने के लिए ही नहीं बल्कि धन प्राप्ति के लिए भी करते है। कहा जाता है कि जिसके जीवन में आर्थिक रूप से समस्या उत्पन्न हो और यदि वे मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर मे जाकर हनुमान जी के चरणों में काले धागे को रख कर और उस पर उसके चरणों में रखी हुई सिंदूर को काले धागे पर लगाकर उसे अपनी तिजोरी में रखते हैं तो उसके जीवन में धन संबंधी समस्याओं का समाधान हो जाता है।

इसी के साथ काले धागे को स्त्री और पुरुष को सही हाथ मे बांधने को कही गई ह के लिए काले धागे को विशेषता बाएं हाथ और पुरुषों के लिए दाएं हाथ में बांधने को कहा गया है जो कि अत्यधिक प्रभावी होता है। ऐसा इसलिए कि ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि कर्म रेखाएं स्त्री के बाएं हाथ और पुरुष के दाएं हाथ में बनी होती है। काला धागा बांधने के लिए अलग-अलग लोगों के अलग-अलग धारणाएं है कोई उसे हाथ में बांधना पसंद करता है तो कोई पैर में, बहुत से लोग काले धागे मैं भगवान का लॉकेट डालकर पहनना पसंद करते है। जब भी कोई व्यक्ति शुभ कार्य के लिए जा रहा होता है तो अक्सर उसे परिवार द्वारा काला टीका लगाया जाता है ताकि वह नकारात्मक ऊर्जा से बचें और अपने कार्य में सफल होके लौटे। तो दोस्तों आज के लिए इतना ही अगर आप भी काला धागा पहनते हैं या काला टीका लगाते हैं तो अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं और अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करें…।

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