महर्षि वेदव्यास ने कलयुग को लेकर की सटीक भविष्यवाणियां?

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मित्रों हमारे शास्त्रों में 4 युगों के बारे में बताया गया है इन चार युगों के नाम है कलयुग, सतयुग, त्रेता युग और द्वापर युग. युग शब्द का अर्थ होता है निर्धारित संख्या के वर्षों की काल अवधि. हर युग की अलग-अलग विशेषताएं रही है. अभी के अनुसार इस समय कल युग चल रहा है. मित्रों ये बड़े संयोग की बात है कि जब वेदव्यास जी जीवित है वो तब जानते थे कि संसार आने वाले 5000 वर्षों में कितना बदल जाएगा.

 कलयुग का कड़वा सच

व्यास जी ने बताया कि कलयुग में धन के लिए गले काटे जाएंगे, पाखंडी बाबाओं का बोलबाला होगा और मनुष्य की आयु भी घट जाएगी. श्रीमद्भागवत में किए गए इस व्याख्या में व्यास जी जो बातें कलयुग के लिए कहते हैं वो आज के समय में प्रासंगिक लगती है. महर्षि व्यास जी के अनुसार कलयुग में मनुष्यों में वर्ण और आश्रम संबंधी प्रवृत्ति नहीं है वेदों से किसी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा और धर्म के नाम पर पंडित अनाप-शनाप पूजाए और यज्ञ करवाएंगे.

कलयुग में विवाह को धर्म नहीं माना जाएगा, सब लोग बिना स्नान करें ही भोजन करेंगे, देवपूजा अतिथि सत्कार श्राद्ध और दलबल की क्रिया कोई नहीं करेगा, शिष्य गुरु के अधीन नहीं रहेंगे, पुत्र भी अपने धर्म का पालन नहीं करेंगे. कोई किसी भी कुल में पैदा क्यों ना हुआ हो जो बलवान होगा वही कलयुग में सबका स्वामी होगा. जो ज्यादा देगा उसे ही मनुष्य अपना स्वामी मानेंगे. पुत्र पिता को तथा बहूये सास को काम करने भेजेंगी.

कलयुग में समय के साथ-साथ मनुष्य वर्तमान पर विश्वास करने वाले शास्त्र ज्ञान से रहित दम्मि और अज्ञानी होंगे. तब जगत के लोग सर्वक्षी हो जाएंगे स्वयं ही आत्म रक्षा के लिए विवश होगें तथा राजा उनकी रक्षा करने में असमर्थ हो जाएंगे. तब मनुष्यों में लोभ और क्रोध की अधिकता हो जाएगी, लोग कन्या बेचकर निर्वाह करेंगे कलयुग की स्त्रियां लोभी नाटी अधिक खाने वाली और मंद भाग्य वाली होंगी वे अपनी इच्छा के अनुसार आचरण करेंगी हाउ भाव और विलास मैं ही उनका मन लगेगा.

अन्याय से धन पैदा करने वाले पुरुषों मैं उनकी आसक्ति होगी कलयुग में स्त्रियां धनहीन पति को त्याग देगी उस समय धनवान पुरुष ही स्त्रियों का स्वामी होगा. वे देह शुद्धि के तरफ ध्यान नहीं देंगी तथा असत्य और कटु वचन बोलेंगी इतना ही नहीं वे दुराचारी पुरुषों से मिलने की अभिलाषा करेगी.  व्यास जी आगे बताते हैं कि कलयुग के समय बुद्धि धन की संग्रह में लगी रहेगी.

 कलयुग के अंत समय की भविष्यवाणियां

कलयुग में थोड़े से धन से मनुष्यों में बड़ा घमंड होगा. उस समय लोग प्रभुता के कारण ही संबंध रखेंगे और धनराशि घर बनाने में ही समाप्त हो जाएगी. इससे दान पुण्य के काम भी नहीं होंगे. सब लोग हमेशा किसी ना किसी क्लेश से घिरे रहेंगे. मनुष्य अपने आप को पंडित समझेंगे और बिना प्रमाण के ही सब कार्य करेंगे लोग ॠण चुकाए बिना ही हड़प लेगे और जिसका शास्त्र में कहीं विधान नहीं है ऐसे यज्ञों का भी अनुष्ठान होगा.

कलयुग के अंतिम चरण आने पर प्रजा बाढ़ और सूखे के भय से व्याकुल रहेगी सब के प्यासे नेत्र आकाश की ओर लगे रहेंगे लेकिन पानी की बूंद भी नहीं गिरेगी. वर्षा ना होने से मनुष्य तपस्वी लोगों की तरह फल कंदमूल व पत्ते खाकर जीवित रहेंगा. कलयुग में आकाल लगातार पड़ता रहेगा. घोर कलयुग के समय मनुष्य 20 वर्ष तक भी जीवित नहीं रहेंगे उस समय 5, 6 अथवा 7 वर्ष की स्त्री और 8, 9 या 10 वर्ष के पुरुषों से ही संतान होने लगेंगी.

उस समय के लोग मंदबुद्धि व्यर्थ के चिन्ह धारण वाले और बुरी सोच वाले होंगे. कलयुग आने पर राजा प्रजा की रक्षा ना करके बल्कि कल के बहाने प्रजा के धन का ही अपहरण करेंगे. अधर्मी मनुष्य संस्कार हीन होते हुए भी पाखंड का सहारा लेकर लोगों को ठगने का काम करेगा उस समय पाखंड की अधिकता और अधर्म की वृद्धि होने से लोगों की आयु कम होती चली जाएगी.

हत्यारों का भी हत्या होने लगेगी चोर अपने ही जैसे चोरों की संपत्ति चुराने लगेगे कलयुग के अंत के समय बड़े भयंकर युद्ध होंगी भारी वर्षा प्रचंड आंधी और जोरो की गर्मी बढ़ेगी लोग खेती काट लेंगे कपड़े चुरा लेंगे. पानी पीने के बरतन तथा पेटियां भी चुरा कर ले जाएंगे. कलयुग चरम पर पहुंचने के बाद पाप धीरे-धीरे कम होने लगेगा फिर धीरे-धीरे लोग साधु महात्माओं की सेवा और दान सत्य प्राणियों की सेवा पुन: तत्पर होने लगेंगे.

दान सत्य एवं प्राणियों की रक्षा में पुन: तत्पर होने लगेंगे इससे धर्म के एक नए चर्म की स्थापना होगी और उस धर्म से लोगों को कल्याण की प्राप्ति होगी. श्रेष्ठ क्या है इस बात पर विचार करने से धर्म ही श्रेष्ठ दिखाई देता है जिस प्रकार धर्म की हानि हुई थी उसी प्रकार धीरे-धीरे प्रजा धर्म की राह पर चलने लगेगी और इस प्रकार धर्म को पूर्ण रूप से अपना लेने पर हो जाएगा इस कलयुग का अंत और सब लोग सतयुग देखेंगे.

कलयुग में देवताओं के राजा इंद्र की पूजा क्यों नहीं होती है?

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