महाभारत युद्ध के बाद पांडवो और श्री कृष्ण का क्या हुआ जानिए?

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महाभारत इस दुनिया का एक मात्र ऐसा ग्रंथ है जिसमें वो सब है जो इस संसार में है और इस संसार में ऐसा कुछ नहीं है जो महाभारत मैं ना हो. इस महा ग्रंथ में ऐसे ऐसे पात्र हैं जिनमें हम अपने आप को देख सकते हैं महाभारत ग्रंथ में एक ऐसे युद्ध का जिक्र हुआ है जो इस पृथ्वी पर उसके बाद कभी नहीं हुआ. यह युद्ध कुरुक्षेत्र की भूमि में पांडवों और कौरवों के बीच हुआ था यह युद्ध चला तो सिर्फ 18 दिन तक था लेकिन इस युद्ध के कारण भारतीय पुरुषों की लगभग 80 फ़ीसदी आबादी खत्म हो गई थी.

 महाभारत युद्ध में बाद क्या हुआ?

इस युद्ध में पांडवों की जीत हुई थी और कौरवो को हार का मुंह देखना पड़ा था लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि पांडवों की जीत के बाद क्या हुआ और कौन से ऐसे योद्धा थे जो इस महा भयानक युद्ध से बच पाये. पांडवों ने कितने समय तक हस्तिनापुर पर शासन किया आखिर पांडवों की मृत्यु कैसे हुई और सबसे महत्वपूर्ण बात कि भगवान श्री कृष्ण का क्या हुआ तो चलिए जानते है.

18 दिन तक चले महाभारत युद्ध से केवल कुछ योद्धा जीवित बच पाए थे जिनमें से पांच पांडव, श्री कृष्ण युयुत्सु, अश्वत्थामा, कृपाचार्य, कृतवर्मा, सत्याकी और वृषकेतु नामक योद्धा शामिल थे. कुरुक्षेत्र का युद्ध जीतने के बाद पांडवों को हस्तिना पुर का शासन मिल गया था. जिसके कि वह हकदार थे और पांडवों के सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर को राजा बनाया गया था.

सभी कौरव तो युद्ध भूमि में भीम के हाथों मारे गए थे लेकिन उनके वृद्ध माता-पिता अभी भी हस्तिनापुर में ही थे.  कौरवों की मृत्यु से दुखी उनकी माता गंधारी ने श्री कृष्ण को खूब कोसा क्योंकि उन्हें यह लगता था कि श्री कृष्ण के कारण ही उनके पुत्र मारे गए थे और गांधारी अपने पुत्रों की तरह ही श्री कृष्ण और यदुवंश के नाश की कामना करती रही.

 महाभारत युद्ध से जुड़े रहस्यमई जानकारी

पांडवों ने हस्तिनापुर पर 36 साल शासन किया. इसी बीच कौरव की मां गंधारी श्री कृष्ण को दिया गया श्राप का असर दिखाने लगा. श्री कृष्ण यदुवंशियों को लेकर प्रभास चले गए. प्रभास क्षेत्र में यदुवंशियों मे बगावत हो गई और उन्होंने इतना खून खराबा किया कि यादव वंश का वजूद ही लगभग खत्म हो गया वह सभी आपस में लड़कर अपनों के हाथों ही मारे गए.

इसके बाद श्री कृष्ण जान गए थे कि उनके इस पृथ्वी को छोड़ देने का समय आ गया है. एक दिन जब श्री कृष्ण गहरी निंद्रा में थे तब एक शिकारी का तीर गलती से भगवान श्री कृष्ण को लग गया जिससे उनकी मृत्यु हो गई इसके बाद श्री कृष्ण ने विष्णु के अवतार में समाहित होकर अपना शरीर त्याग दिया.

कुछ समय बाद वेदव्यास जी ने युधिष्ठिर से कहा कि उनके और उनके भाइयों के जीवन का उद्देश्य पूरा हो गया है अब उन्हें हिमालय की ओर प्रस्थान करना चाहिए, उसी समय द्वापर युग समाप्त होने को था और कलयुग शुरू होने ही वाला था. उधर हस्तिनापुर में अराजकता और अधर्म में फैलने लगा था जिसे देखकर युधिष्ठिर राजपाट परीक्षित को सौंप कर पांडवों और द्रोपति के साथ हिमालय के मार्ग से स्वर्ग जाने को चल पड़े.

रास्ते में एक कुत्ता जो की दरअसल भगवान यम थे वह भी उनके साथ चल पड़े. रास्ते में इनकी एक के बाद एक मृत्यु हो जाती है जिसकी शुरुआत द्रोपति से होती है भीम की सबसे आखिर में मृत्यु होती है इनकी मृत्यु का संबंध उनके अभिमान और अभिलाषा से जुड़ा हुआ था लेकिन युधिष्ठिर ही अकेले थे जिनको किसी बात का अभिमान नहीं था और वह कुत्ते के साथ स्वर्ग के द्वार तक पहुंच जाते हैं.

स्वर्ग के द्वार पर पहुंचने पर कुत्ता यम के रूप में आ जाता है यम स्वर्ग में प्रवेश से पहले युधिष्ठिर को नर्क में ले जाते हैं वहां युधिष्ठिर अपने भाइयों और द्रोपती को पाप का पश्चताप करते हुए देखते हैं इसके बाद भगवान इंद्र युधिष्ठिर को लेकर स्वर्ग जाते हैं और वादा करते हैं कि उनके भाई और द्रोपती भी बहुत जल्द ही वहां उनसे मिलेंगे और इस तरह भगवान कृष्ण और पांडवो ने यह संसार त्यागा इसके बाद कलयुग शुरू हुआ जिसे हम आज का संसार कहते हैं.

कलयुग किस-किस स्थान पर निवास करता है?

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